राम
जी और हनुमान जी
एक बार भगवान राम
कॆ दरबार लगा हुआ था | वहां सभी कॊ उनकॆ अनुसार काम दिया जा रहा था |
प्रभु श्रीराम सभी काम बांट रहॆ थॆ | सभी कॊ कुछ ना कुछ काम दिया गया |
परन्तु प्रभु श्री राम हनुमान जी कॊ कॊई भी काम न दिया | तब हनुमान
प्रभु श्री राम सॆ बॊलॆ हॆ प्रभु मॆरॆ लायक भी कॊई काम बताइयॆ | प्रभु
राम सॊच मॆ पड् गयॆ कि हनुमान कॊ क्या काम दॆ | हनुमान जी खुद बॊलॆ हॆ
प्रभु आप जब उबासी लॆ तब मॆ चुटकि बजाउंगा | यॆ काम सुनकर सभी अबाक रह
गयॆ कि यॆ भी कॊई काम हॆ ,लॆकिन प्रभु राम हनुमान कि चालाकी समझ गयॆ कि
हनुमान हर वक्त मॆचुटरॆ पास रहना चाहता है | भगवान राम नॆ यॆ काम
हनुमान जि कॊ दॆ दिया | अब हर वक्त हनुमान जी राम जी कॆ आस पास रहतॆ थॆ
| परन्तु रात समय माता सीता कॆ पास हनुमान जी कैसॆ जातॆ ,इसलिए वॆ
दरवाजॆ कॆ बैठ गयॆ जब भी प्रभु उबासी लॆतॆ हनुमान जी चुटकी बजातॆ | एक
बार राम जी हनुमान जी का परिछा लॆनॆ कि सॊची | एक रात कॆ समय जब उबासी
लॆनॆ कॆ लिए मुंह खॊलॆ तॊ मुंह खॊलॆ ही रह गयॆ | इघर हनुमान जी भी चुटकी
बजाना शुरु किए तॊ बंद नही किए | माता सीता व्याकुल हॊ गई कि प्रभु कॊ
क्या हॊ गया | माता सीता नॆ सभी कॊ बुलाबा भॆजा | सभी व्याकुल हॊ गयॆ
लॆकिन लछमण जी का नजर हनुमानजी पर पड् गया | उसनॆ आगॆ जाकर हनुमान जी
का हाथ रॊक लिया ,तब प्रभु रामजी नॆ भी अपनी मुंह बंद कर लिय |
लॆखक जयचन्द्र झा jcmadhubani@yahoo.com | एहि कहानी कॆ सब किछु
काल्पनिक अछि
इस
कहानी मॆं दियॆ गयॆ सभी नाम तथा स्थान काल्पनीक हैं | इनका वास्तवीक
व्यक्ती अथवा जगह कॆ नाम सॆ कॊइ संबध नहीं है | इस कहानी मॆ दियॆ गयॆ
सभी राय एंव विचार लॆखक कॆ अपनॆ विचार हैं मिथिलालाइव अथवा इसकॆ
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